15 August, 2015

महज 50 रुपए से शुरू हुई कंपनी वर्तमान में डिजिटल मार्केटिंग

कॉलेज की पढ़ाई के साथ जॉब स्किल्स सीखने के लिए अभिषेक ने सेल्समैन की जॉब की। लेकिन आईटी में दिलचस्पी के चलते उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाने का मन बनाया। कारोबार के शुरुआती अनुभव बुरे रहे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और छोटी सी रकम से कारोबार की नींव रखकर उसे मजबूत मुकाम तक पहुंचाया।
तस्वीरों का प्रयोग प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।



महज 50 रुपए से शुरू हुई कंपनी वर्तमान में डिजिटल मार्केटिंग, क्लाउड एंड वेब एप्लीकेशन और एंटरप्राइज मोबिलिटी जैसी सेवाएं प्रदान कर 40 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर चुकी है।
कोलकाता के कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक ने आंत्रप्रेन्योरशिप का सफर तब शुरू किया जब वे सिर्फ 19 वर्ष के थे। इसकी शुरुआत कॉलेज के दिनों से हुई। दरअसल, कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से कॉमर्स (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन के साथ जॉब स्किल्स सीखने के लिए अभिषेक ने सिटीबैंक
में सेल्समैन की जॉब ले ली। इसी दौरान एक सड़क दुर्घटना में पैर के चोटिल हो जाने के कारण अभिषेक को तीन महीने का आराम करने की सलाह दी गई।
इन तीन महीनों में अभिषेक ने अपना समय व्यर्थ गवांकर कम्प्यूटर से जुड़ी स्किल्स को पैना बनाने में बिताया। अपने इस अनुभव हो साझा करते हुए अभिषेक बताते हैं कि 'उन तीन महीनों में कम्प्यूटर में मेरी दिलचस्पी बढ़ती गई और मैं इससे जुड़ी चीजें सीखता रहा। मैंने घर पर ही एनिमेशन तैयार करना शुरू कर दिया और कुछ छोटे फ्री प्रोजेक्ट्स हाथ में लिए। इन्हें कामयाबी के साथ पूरा करने पर मुझे एहसास हुआ कि मुझे आईटी में आगे बढ़ना चाहिए।

इसी सोच के साथ मैं एक कंपनी में जॉब के लिए गया। लेकिन उन्हें एनिमेशन के नहीं बल्कि एचटीएमएल के जानकार की जरूरत थी। वहां से खाली हाथ लौटने के बाद मैंने बुकस्टोर से एचटीएमएल की किताब खरीदी और इसे सीखना शुरू किया।'

पहले वेंचर में खाया धोखा 
कुछ समय बाद अभिषेक ने एक -मेल सर्विस सेंटर शुरू करने का मन बनाया और इसके लिए उन्हें अपने पिता से भी पूरा सहयोग मिला। अभिषेक ने यह सेंटर 1997 में शुरू किया जब इंटरनेट का कॉन्सेप्ट बहुत नया था। परिवार से 46,000 रुपए का उधार लेकर शुरू किए गए इस सेंटर के लिए अभिषेक ने 30,000 रुपए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को दिए और शेष राशि को अन्य आवश्यकताओं पर खर्च किया। लेकिन कुछ ही दिनों में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ने अपना बिजनेस बंद कर दिया और अभिषेक सहित अपने सभी क्लाइंट्स के रुपए लेकर फरार हो गया। इससे अभिषेक को बड़ा धक्का लगा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक नई शुरुआत करने की ठानी।

छोटा निवेश नई शुरुआतइस बार वे कुछ ऐसा करने की तलाश में थे जिसमें ज्यादा निवेश की आवश्यकता हो। इसी के चलते अभिषेक ने लोगों से मिलने और अपने संपर्क बढ़ाने के मकसद से टेक्नोलॉजी एक्सपो जाना शुरू किया।
यहां उन्हें महसूस हुआ कि ऐसे एक्सपो में अपने आउटलेट्स के जरिए लोग अपने कारोबार में इजाफा करने में सफल हो रहे थे। अभिषेक ने भी वेबसाइट डिजाइनिंग के अपने हुनर को प्लेटफॉर्म देने के लिए ऐसे ही एक एक्सपो में स्टॉल रेंट पर लेने का फैसला लिया। लेकिन यहां तीन दिन के लिए स्टाॅल का किराया 6,000 रुपए था और अभिषेक के पास इतने रुपए नहीं थे। इसी का हल खोजते हुए उन्होंने स्टॉल का एक हिस्सा दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर करने का फैसला लिया जो मोडेम बेच रहा था। यहां अभिषेक ने अपनी वेबसाइट डिजाइनिंग का प्रचार हैंडबिल्स के जरिए किया जिसमें उन्हें महज 50 रुपए का खर्च आया। यहां तक कि ब्रांड का नाम भी वहीं तय हुआ और इस तरह इंडस नेट टेक्नोलॉजीज का जन्म हुआ।
एक्सपो में हर दूसरी कंपनी वेबसाइट डिजाइनिंग ऑफर कर रही थीं लेकिन उनकी सेवाएं प्रीमियम पर थीं इसलिए अभिषेक की स्टॉल पर आने वाले लोगों की संख्या अधिक थी। अभिषेक के अनुसार 'तीन दिन चले इस एक्सपो के दौरान मैंने दो प्रोजेक्ट्स हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली।
इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए मुझे 20,000 रुपए मिलने तय हुए जिसका 50 प्रतिशत मुझे एडवांस के तौर पर मिला।'

वेब होस्टिंग सर्विस से पाई तरक्की 
एक्सपो के दौरान अभिषेक ने स्टॉल शेयर करने वाले व्यक्ति की मोेडेम बेचने में काफी सहायता की। इस सहयोग के बदले उस व्यक्ति ने अभिषेक के हिस्से के किराए का भुगतान भी कर दिया।
अब अभिषेक के लिए दो क्लाइंट्स के साथ शुरू हो चुके अपने बिजनेस को मैनेज करना जरूरी था। इसके लिए उन्होंने काफी रिसर्च की और कई किताबें पढ़ीं।
इसी बीच उनसे वेब होस्टिंग सर्विस के बारे में कई लोगों ने पूछताछ की। इससे अभिषेक को महसूस हुआ कि इस क्षेत्र में कुछेक ही प्लेयर्स थे जो अपनी सर्विसेज के लिए मोटी फीस की मांग कर रहे थे। अभिषेक ने इस दिशा में हल खोजने की कोशिश की और वेब होस्टिंग सर्विस प्रदान करने वाली एक इटैलियन कंपनी से संपर्क करने में कामयाब हो गए जो कि भारतीय कंपनियों द्वारा ली जाने वाली फीस का 20 फीसदी ही चार्ज कर रही थी। इसके अलावा उन्होंने कंपनी की सर्विस को भारत में उपलब्ध करवाने के लिए तन माह का ऋण भी मंजूर करवा लिया।
इस सर्विस की मदद से अभिषेक का बिजनेस तेजी से तरक्की करने लगा। इस तरक्की को देखकर अभिषेक ने इसी बिजनेस को कॅरिअर के रूप में अपनाने का फैसला लिया।

कड़ी प्रतिस्पर्धा में बनाई पहचान 
कुछ महीनों तक कंपनी को कोई कारोबार नहीं मिला। हाथ पर हाथ रखकर बैठना अभिषेक को मंजूर नहीं था इसलिए उन्होंने ग्लोबल कस्टमर्स बनाने के प्रयास शुरू किए। इसके लिए उन्होंने खुद को सोशल मीडिया साइट्स पर रजिस्टर किया। इससे 2000 के अंत तक उनके कारोबार में फिर से जान लौट आई। इसके बाद अभिषेक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज कोलकाता चेन्नई के अपने ऑफिस से डिजिटल मार्केटिंग, क्लाउड एंड वेब एप्लीकेशन और एंटरप्राइज मोबिलिटी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 200 से अधिक क्लाइंट्स और 500 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ इंडस नेट टेक्नोलॉजीज का टर्नओवर वर्ष 2013-14 में 40 करोड़ दर्ज किया गया।


एक वर्ष के ब्रेक में पिछड़ा कारोबार 
बिजनेस की शुरुआत के लिए उन्हें अपनी बिजनेस स्किल्स को पैना बनाने की जरूरत महसूस हुई। इसी जरूरत के चलते उन्होंने यूके की यूनिवर्सिटी से मल्टीमीडिया में एमएस करने का निर्णय लिया और एक वर्ष के लिए अपना कारोबार बहन को संभालने के लिए कहा। डिग्री लेकर लौटे तो एयरपोर्ट के बाहर डॉटकॉम कंपनियों के हाेर्डिंग देखकर हैरान रह गए। उन्हें समझ गया था कि गुजरे एक साल में डॉटकॉम बूम के चलते कई नए कारोबार खड़े हो चुके हैं और इस लिहाज से वे पिछड़ चुके हैं। वेब होस्टिंग बाजार में कड़ी टक्कर को देखते हुए अभिषेक ने वेब डिजाइनिंग पर ध्यान देने का फैसला लिया।

ये रहे हैं कंपनी के अचीवमेंट्स
> साल 2008 में डन और ब्रैडस्ट्रीट ने इंडस नेट टेक्नोलॉजी को पहली #IT SME होने का खिताब दिया।
> 2010 नासकॉम ने इमरजिंग 50 कंपनी में उन्हें जगह दी।
> टेक्नोलॉजी क्षेत्र में एशिया की पहली 500 कंपनी में डेलॉएट टेक्नोलॉजी ने उन्हें जगह दी।
> डेलॉएट ने ही उन्हें 2011 में भारत की 50 सबसे तेज ग्रोइंग कंपनियों में जगह दी।
मिल चुके हैं कई अवार्ड
> बंगाल कॉरपोरेट अवार्ड, 2013
> इंडिया एसएमई 100 अवार्ड, 2014
> फ्रेंचाइज इंडिया, स्मॉल बिजनेस ऑफ ईयर अवार्ड, 2014

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