बुक्स का बिजनेस करने वालों ने खड़ी की लगभग 12,000 करोड़ रुपए की कंपनी ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के जरिए लाखों यूजर्स और सेलर्स प्रोडक्टस की ऑनलाइन शॉपिंग और सेलिंग करते हैं। लगभग 12,000 करोड़ रुपए की कंपनी बन चुकी फ्लिपकार्ट के यहां तक पहुंचने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इतनी बड़ी कंपनी खड़ी करने के पीछे किसी बड़े कारोबारी का हाथ नहीं है, बल्कि कभी बुक्स सेलिंग का बिजनेस करने वाले दो लोगों ने अपनी मेहनत से इसे खड़ा किया है। आइए जानते हैं इस कंपनी का पूरा सफर
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| तस्वीरों का प्रयोग प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। |
1 . ऐसे बनी फ्लिपकार्ट
कंपनी की नींव रखने वाले दो दोस्त सचिन बंसल और बिन्नी बंसल की मुलाकात आईआईटी दिल्ली में हुई थी। आईआईटी ग्रैजुएट दोनों दोस्तों ने पासआउट होने के बाद तकरीबन एक साल तक अलग-अलग कंपनियों में काम किया। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते दौर को देखते हुए दोनों ने अमेरिकी
ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ज्वाइन की। यहां काम करते वक्त दोनों ने अपना बिजनेस करने का मन बनाया। इसके लिए अक्टूबर 2007 में दोनों ने दो-दो लाख रुपए जुटाए और अमेजन छोड़कर ई-कामर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट की नींव रखी।
ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ज्वाइन की। यहां काम करते वक्त दोनों ने अपना बिजनेस करने का मन बनाया। इसके लिए अक्टूबर 2007 में दोनों ने दो-दो लाख रुपए जुटाए और अमेजन छोड़कर ई-कामर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट की नींव रखी।
2 . दो कमरों से शुरू किया था बिजनेस
सचिन और बिन्नी ने बेंगलुरू के अपने दो कमरों वाले फ्लैट में दो कम्प्यूटर के साथ बुक्स की ऑनलाइन बिक्री के लिए वेबसाइट शुरू की। लेकिन, दस दिनों तक उन्हें एक भी ऑर्डर नहीं मिला। इसी बीच उन्हें आंध्रप्रदेश से एक ग्राहक ने ‘लिविंग माइक्रोसॉफट टू चेंज द वर्ल्ड’ किताब का ऑर्डर दिया। यह कंपनी के लिए पहला ऑर्डर था।
3 . 18 महीने बाद मिला था इन्वेस्टर इन्हे
कंपनी शुरू करने के 18 महीने बाद तक सचिन और बिन्नी बंसल को अपने खर्च के लिए हर महीने पैरेंटस से दस हजार रुपए मंगाने पड़ते थे। हालांकि, बिजनेस न चल पाने से वो निराश नहीं हुए। आखिरकार किस्मत ने साथ दिया और वर्ष 2009 में एसेल पार्टनर (इंडिया) का साथ मिल गया। एसेल पार्टनर ने फ्लिपकार्ट में 10 लाख डॉलर का निवेश किया। कारोबार बढ़ता गया और फ्लिपकार्ट को निवेशक मिलते गए। साल 2010 में टाइगर ग्लोबल ने भी फ्लिपकार्ट में भरोसा जताया और 2 करोड़ डॉलर का निवेश किया।
4 . ऑनलाइन मनी स्टोर प्रीपेड वॉलेट लॉन्च
निवेशक मिलने से कंपनी का दायरा बढ़ता गया। फ्लिपकार्ट ने वर्ष 2011 में ऑनलाइन मनी स्टोर प्रीपेड वॉलेट लॉन्च किया। इसे मार्केट में काफी पसंद किया गया। कंपनी ने अपने अगले चरण में वर्ष 2012 में इन्वेस्टर्स से 15 करोड़ डॉलर जुटाए और डिजिटल म्यूजिक स्टोर फ्लाइट लॉन्च किया।
5 . सेलर्स के लिए मार्केटप्लेस
दो स्टोर लॉन्च करने के बाद फ्लिपकार्ट ने सेलर्स को अपनी कंपनी के साथ जोड़ने का प्लान बनाया। साल 2013 में कंपनी ने इसकी लॉन्चिंग भी कर दी। सेलर्स प्लेटफॉर्म मिलने से कुछ कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट ऑनलाइन बेचने में रुचि दिखाई और प्रोडक्ट की बिक्री शुरू की। इसके बाद फ्लिपकार्ट को ऑनलाइन ऑर्डर मिलने लगे। इस दौरान कंपनी को अपना डिजिटल म्यूजिक स्टोर फ्लाइट बंद करना पड़ा। कंपनी यहीं नहीं रूकी और ग्राहकों के लिए एक नई सुविधा पेमेंट गेटवे पे-जिप्पी लॉन्च किया। अगले कुछ दिनों में मौजूदा निवेशकों से 36 करोड़ डॉलर और जुटाए।
6 . बिग बिलियन डे सेल लगाई
2014 में कंपनी के पास ग्रास मर्चेंडाइज वॉल्युम एक अरब डॉलर हो गई इसके बाद कंपनी ने 30 करोड़ डॉलर में ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म www.myntra.com खरीदा। कंपनी ने इसी साल चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा की तर्ज पर इंडिया में बिग बिलियन डे सेल लगाई। वहां से कंपनी की वैल्युएशन में बड़ा अंतर आया। आज फ्लिपकार्ट लगभग 12,000 करोड़ रुपए की कंपनी हो गई है, लेकिन कंपनी को अन्य कई दूसरी कंपनियों से भी कड़ी चुनौती मिल रही है। आज फ्लिपकार्ट भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। कंपनी ने अपनी वेबसाइट को बंद करके मोबाइल ऐप पर लॉन्च कर दिया है।
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